छत्तीसगढ़ सरगुजा

कलयुग का सबसे बड़ा अपराध: चुप्पी

Posted on Jan 19, 2026 01:46 PM

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कलयुग का सबसे बड़ा अपराध: चुप्पी

अम्बिकापुर - समाज में हो रहे अन्याय और अत्याचार पर चुप रहना केवल तटस्थता नहींबल्कि उस अन्याय में प्रत्यक्ष भागीदारी के समान है। यदिकिसी व्यक्ति के साथ अत्याचार हो रहा हो और उसे देखकरजानकर भी कोई मौन साध लेतो वह नैतिक रूप से उसी अपराध का हिस्सेदार बनजाता है। यह विचार आज के समय में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया हैजब सूचना हर हाथ में है और अभिव्यक्ति के साधन सबके पासउपलब्ध हैं। विशेषज्ञों और सामाजिक चिंतकों का मानना है कि अन्याय केवल तब नहीं होता जब वह हमारे साथ घटेबल्कि तब भी होता है जबसमाज के किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का हनन किया जाए। चाहे वह अत्याचार किसी परिचित पर होकिसी अजनबी पर या समाज के किसी बड़ेवर्ग पर यदि उसकी जानकारी होते हुए भी हम मौन रहते हैंतो यह चुप्पी उस अत्याचार को वैधता प्रदान करती है।

अक्सर लोग यह सोचकर पीछे हट जाते हैं कि “इसमें मेरा क्या नुकसान है?” लेकिन इतिहास और समाज दोनों गवाह हैं कि अन्याय को अनदेखाकरने की आदत अंततः उसी अन्याय को हमारे दरवाज़े तक ले आती है। आज यदि हम दूसरों के लिए नहीं बोलतेतो कल जब अन्याय हमारे साथहोगातब हमारे लिए भी कोई आवाज़ नहीं उठाएगा। आज के डिजिटल युग में आवाज़ उठाना पहले से कहीं आसान हो गया है। सोशल मीडिया ने हरनागरिक को अभिव्यक्ति का मंच दिया है। किसी के पक्ष में कुछ शब्द लिखनासच को साझा करनाया अन्याय के विरुद्ध उठ रही आवाज़ को आगेबढ़ाना ये छोटे कदम भी बड़े सामाजिक परिवर्तन का कारण बन सकते हैं। यदि स्वयं लिखना संभव  होतो कम से कम सच बोलने वालों की आवाज़को साझा करना भी एक जिम्मेदारी है। जब अन्याय व्यापक रूप ले लेजब अधिकारों का खुला हनन हो और जब कोई व्यक्ति या समूह आपकी भीलड़ाई लड़ रहा होतब मौन रहना सबसे बड़ा अपराध बन जाता है। ऐसे समय में चुप्पी नहींसामूहिक स्वर ही परिवर्तन ला सकता है। विशेषज्ञों काकहना है कि यह कलयुग हैजहाँ अक्सर फैसले बहुमत से होते हैं। यदि बहुमत सच के साथ खड़ा  होतो कई बार सच्चाई भी हार जाती है। इसलिएजरूरी है कि समाज का हर जागरूक नागरिक अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध उठ रही आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाए।

क्योंकि याद रखिए

मौन केवल चुप्पी नहींसहमति भी होता है।

और अन्याय के सामने सहमतिस्वयं अन्याय है।

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