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पानी टंकी में डूबकर शिक्षिका की बेटी की मौत, तीन माह बाद प्राचार्य पर केस

Posted on Jun 27, 2024 01:59 PM

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पानी टंकी में डूबकर शिक्षिका की बेटी की मौत, तीन माह बाद प्राचार्य पर केस

अंबिकापुर : जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) अंबिकापुर परिसर में तीन माह पहले एक शिक्षिका कलावती की चार वर्षीय बच्ची की भूमिगत पानी टंकी में डूबने से मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने तत्कालीन प्राचार्य शशि सिंह के विरुद्ध धारा 304 (ए) के तहत प्राथमिकी कर ली है। तीन महीने से अधिक समय तक चली जांच में पुलिस ने पाया कि डाइट परिसर की भूमिगत पानी टंकी का ढक्कन नहीं था। ढक्कन के नाम पर संस्थान के बेंच के पटरे को असुरक्षित तरीके से रख दिया गया था। अबोध बालिका के उस पर पैर रखते ही असंतुलित होकर गिर पड़ी। इस कारण उसकी मौत हो गई। 12 मार्च 2024 को हुई घटना को लेकर पीड़ित परिवार ने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में परिवाद दाखिल किया है। इसमें लापरवाही के आरोप है। इधर न्यायालय में परिवाद के बाद पुलिस पर भी शीघ्रता से जांच का दबाब था। लगभग साढ़े तीन माह बाद पुलिस ने आखिरकार तत्कालीन प्राचार्य के विरुद्ध एफआइआर पंजीकृत किया है।

क्या है धारा 304 ए

भारतीय दंड संहिता की धारा 304 ए, लापरवाही से मौत का कारण बनने पर लागू होती है। अगर कोई व्यक्ति किसी की मौत किसी ऐसे उतावलेपन या उपेक्षापूर्ण काम से कर देता है, जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में न आता, तो उसे इस धारा के तहत दो साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इस मामले में भी प्राचार्य के विरुद्ध प्राथमिकी हुई है।

समझिए कैसे बरती गई लापरवाही

  •  लोक निर्माण विभाग ने मरम्मत के नाम पर बड़ी राशि खर्च की लेकिन भूमिगत पानी टँकी का मजबूत ढक्कन नहीं लगाया।
  •  संस्था प्रबंधन ने तत्काल सीसी कैमरे की जांच नहीं की।
  •  तत्काल सीसी कैमरे की जांच होती तो बालिका लंबे समय तक पानी टँकी में डूबी नहीं रहती।
  •  भूमिगत पानी टँकी में ढक्कन के नाम पर बेंच का टूटा व कमजोर पटरा रख दिया गया था।
  •  असुरक्षित पानी टँकी के आसपास कोई घेरा नहीं था। किसी प्रकार के सुरक्षा के उपाय अथवा चेतावनी व सतर्कता का संकेतक नहीं लगाया गया था।

यह है मामला

लखनपुर के बेलदगी भण्डारपारा की शिक्षिका कलावती प्रशिक्षण के लिए जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) अंबिकापुर आई हुई थी। घटना दिवस 12 मार्च 2024 को वह प्रशिक्षण प्राप्त कर रही थी। संस्थान के आंगन में उनकी चार साल की मासूम बेटी ध्वनि खेल रही थी। अचानक वह ओझल हो गई। बेचैन मां के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षक-शिक्षिकाओं ने खोजबीन शुरू की। परिसर में असुरक्षित पानी टँकी का कमजोर लकड़ी का ढक्कन टूटा मिला था। संदेह के आधार पर जब एक छात्र को भूमिगत टँकी में नीचे उतारा गया तो बालिका मिली। उसे तत्काल नजदीक के निजी अस्पताल ले जाया गया। जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।

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